भाई अउ बेहन जउन पाप करथै
15 अगर तुम्हर भाई तोर बिरोध अपराध करथै, ता अकेल्ले हे जाय के ओही समझा, अगर ऊ तोर बात के सुनही, ता तै अपन भाई के जीत लय हबस।
15 अगर तुम्हर भाई तोर बिरोध अपराध करथै, ता अकेल्ले हे जाय के ओही समझा, अगर ऊ तोर बात के सुनही, ता तै अपन भाई के जीत लय हबस।