दसठे कुमारिन कर किस्सा
1 "ऊ रोज स्वरग कर राज उन दसठे कुमारिन के मेर होही, जउन चिमनी लइके दुलहा लग मिलै निकडथै।" 2 उन मसे पांचठे समझदार रथै अउ पांचठे मूरुख रथै। 3 मूरुख कुमारिन अपन चिमनी के संग तेल नेहको रखे रहिन। 4 पय उन समझदार कुमारिन अपन चिमनी के संग चुकरा हे तेल रखे रहिन। 5 काखे दुलहा के आमै हे देरी होथै, ता उन डउकी ऊंघात-ऊंघात सोय जथै।
6 आधा रात हे गोहराथै, देखा दुलहा डउका आथै। ओखर मुलाखात करै हरबी चला। 7 तब सगलू कुमारिन उठके अपन-अपन चिमनी के बत्ती निक्खा करै लग जथै। 8 मूरुख कुमारिन समझदार कुमारिन लग कथै, अपन तेल मसे हमुन के चुटको हस दइदा, काखे हमर चिमनी बिताथै। 9 पय समझदार कुमारिन उनखर लग कथै, बिलकुन हइ हमर अउ तुम्हर निता पूर नेहको होही, निक्खा हइ होही कि तुम दुकान हे जाय के तेल खरीद ले आना। 10 जब उन मूरुख कुमारिन तेल खरीदय जथै, कि एतका हे दुलहा डउका आय जथै, जउन समझदार कुमारिन तइयार रथै, उन दुलहा डउका के संग काज बाले घर हे कढ जथै, अउ कंवाड बन्द कर दय गइस।
11 कुछ टेम बाद मूरुख कुमारी हइ कहत आथै, हे परभु हे परभु हमर निता कंवाड उघार दे। 12 पय दुलहा डउका जबाब देथै, मै तुम्हर लग सही कथै, मै तुमही नेहको चीनथो।
13 इहैनिता जागत रहा, काखे तुम ऊ घडी के अउ ऊ टेम के नेहको जानथा, कि कब मनसे कर टोरवा आही।