तीनठे हरवाहन कर किस्सा
14 स्वरग कर राज ऊ मनसे के जसना होही, जउन दूसर देस जात टेम अपन हरवाहन के बोलाथै, अउ उनही अपन डेरा सउप देथै। 15 ऊ मालिक सबझन के उनखर सक्ति के हिसाब लग, अक्ठी हरवाह के सोना के पांचठे पइसा, दूसर हरवाह के दुइठे पइसा अउ फेर तीसर हरवाह के अक्ठी पइसा देथै, एखर बाद हे ऊ परदेस कढ गइस। 16 तब जेही पांचठे सोना के पइसा मिलथै, ऊ लेन-देन करके पांचठे पइसा अउ कमाय लेथै। 17 हइ मेर लग जेही दुइठे पइसा मिले रथै, उहो दुइठे पइसा अउ कमाय लेथै। 18 पय जेही अक्ठी पइसा मिले रथै, ऊ जाय के मालिक के पइसा के भुंइ हे खोद के लुकाय देथै।
19 बोहत रोज के बाद ऊ हरवाहन के मालिक वापिस लउटके ऊ हरवाहन लग हिसाब मांगथै। 20 जेही पांचठे पइसा मिले रथै, ऊ पांचठे पइसा अउ लायके मालिक लग कथै, मालिक देख, मै पांचठे पइसा अउ कमाय लय हव। 21 ओखर मालिक कथै, बोहत बढिहा, निक्खा अउ इमानदार हरवाह, तै चुटु हस सोना के पइसा हे इमानदार रहे हस, मै तोके बोहत चीजन के उप्पर हक देहुं, अपन मालिक के मगन हे सहपारटी हुइ जा। 22 एखर बाद जेही दुइठे पइसा मिले रथै, उहो आयके कथै, मालिक तै मोके दुइठे पइसा दय रहस, देख मै दुइठे अउ पइसा कमाय हव। 23 ओखर मालिक ओखर लग कथै, बोहत बढिहा, निक्खा अउ इमानदार हरवाह, तै चुटु हस पइसा हे इमानदार रहस, मै तोके बोहत चीजन के उप्पर हक देहुं, अपन मालिक के मगन हे सहपारटी हुइ जा। 24 तब ऊ आखरी हे आथै, जेही अक्ठी पइसा मिले रथै, ऊ आयके कथै, हे मालिक मै तोके जानथो, कि तै कठोर मनसे हबस, तै जिहां लग नेहको बोथस, उछो लग काटथस अउ जिहां नेहको छिटथस उछो लग बटोरथस। 25 इहैनिता मै डेराय गय रहों, अउ जाय के तोर पइसा के भुंइ हे लुकाय दय रथो, देख, हइ तोर पइसा हबै। 26 ओखर मालिक जबाब देथै, तै बेकार अउ आलसी हरवाह हबस, तै जानत रहस ना, कि जिहां मै नेहको बोथो, उहै काटथो, जिहां नेहको बोथो, उछो लग दाना बटोरथो, 27 इहैनिता तोके सोनरन के लिघ्घो मोर पइसा जमा कर देके चाही, ताकि मै लउटत टेम ओखर लग बेयाज सहित लइ लेतो। 28 "इहैनिता एखर लग सोना के पइसा लइके ओही दइ देया, जेखर लिघ्घो दसठे पइसा हबै। 29 काखे जेखर लिघ्घो हबै, ओही अउ दय जही अउ ओखर लिघ्घो बोहत हुइ जही, पय जेखर लिघ्घो नेहको हबै, जउन ओखर लिघ्घो हबै उहो के लइ ले जही। 30 इहैनिता हइ ढिलवा हरवाहन के बाहिर के अंधियार हे फटिक देया, जिहां मनसे रोथै अउ दांत पीसथै।"