धन्य बचन
3 धन्य हबै ऊ जउन मन के दीन हबै,
काखे स्वरग कर राज उनखर निता हबै।
4 धन्य हबै ऊ जउन सोक करथै,
काखे उनके सान्ति मिलही।
5 धन्य हबै ऊ जउन नम्र हबै,
काखे ऊ भुंइ के अधिकारी हुइहिन।
3 धन्य हबै ऊ जउन मन के दीन हबै,
काखे स्वरग कर राज उनखर निता हबै।
4 धन्य हबै ऊ जउन सोक करथै,
काखे उनके सान्ति मिलही।
5 धन्य हबै ऊ जउन नम्र हबै,
काखे ऊ भुंइ के अधिकारी हुइहिन।