19 हे पिरिया भाई तुम खुदय के नियाव झइ करा, पय उके भगवान के क्रोध हे छांड देया, काखे पवितर किताब हे लिखररे हबै, परभु कथै, पलटा लेय के मोर काम हबै, मै पलटा लेहूं। 20 अगर तुम्हर बैरी भूखे हबै, ता उके खाना खबाबा, अगर ऊ पियासे हबै, ता उके पानी पियाबा, काखे असना करै लग ऊ तोर माया मेर बेउहार लग अंगरा के ढेर लगाही। 21 बुराई लग हार झइ माना, बलुक अच्छाई के दवारा बुराई के जीत लेया।