5 अक्ठी मनसे सोचथै, कि अक रोज दूसर रोज लग निक्खा हबै, दूसर मनसे सोचथै, कि हर रोज अक जसना हबै, एखर बारे हे हर मनसे अपन मन हे पूर बिस्वास करथै।
5 अक्ठी मनसे सोचथै, कि अक रोज दूसर रोज लग निक्खा हबै, दूसर मनसे सोचथै, कि हर रोज अक जसना हबै, एखर बारे हे हर मनसे अपन मन हे पूर बिस्वास करथै।