घमंड के बारे हे चेतन्त
13 तुम जउन हइ कथा, "हम आज या कल हमु सहर जउबे, अक साल तक उछो रही के धन्धा करबे अउ पइसा कमाबो" मोर बात सुना। 14 तुम नेहको जानथा कि कल तुम्हर का हालत होही। तुम्हर जीवन अक्ठी कोहिटा मेर हबा, ऊ अक घरी देखही फेर उजाय जही4:14 नीति 27:1। 15 तुमही हइ कहै चाही, "अगर परभु के इक्छा होही, ता हम जिन्दा रहबो अउ हइ या ऊ काम करब।" 16 पय तुम अपन बडाई हे घमंड करत हबा, हइ घमंड पाप लग भरे हबै, 17 जउन मनसे भलाई करै के जानथै, पय नेहको करथै उके पाप लगथै।