54 आरू जव नाशवान अमरकाया डील क पेहेरी लेछे, आरू यो मरलोहार देह अमरकाय डील क पेहरी लेछे, तव वो वचन जो लिख्यो छे पूरो होय जाछे: "जय ने मरला क निघल लेदो। 55 हे मरला तारी जय काँ रयी? हे मरला, तारो आहळ क रया?"
54 आरू जव नाशवान अमरकाया डील क पेहेरी लेछे, आरू यो मरलोहार देह अमरकाय डील क पेहरी लेछे, तव वो वचन जो लिख्यो छे पूरो होय जाछे: "जय ने मरला क निघल लेदो। 55 हे मरला तारी जय काँ रयी? हे मरला, तारो आहळ क रया?"