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मत्ती 15

3 ईशगहन जविो, मरि रण यहभगवे? 4 हकि यहभगवकयो, "मरिकरजो, आरकहे, उकि" 5 पर कहवो, ि यदि आपसकहे, यदहय सकतो, यहभगवेंचढ़ािो। 6 आपसिकरे, इनि मरि रण यहभगववचन ा। 7 ोंकरना, यशमरभविकरिो:

8 गहन िकरे,

ओकमन रये।

9 आरिभकि करे,

"हकि ियम धरम िकऱे।"

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