21 एरकरीन सारी मलिनता आरू बैर भाव की बढ़ती क दूर करीन, उना वचन क नम्रता छे मान्य कर लेवु जो दिल मा वेर्या गया आरू जो तुमरे जीव क उध्दार कर सकता छे।
21 एरकरीन सारी मलिनता आरू बैर भाव की बढ़ती क दूर करीन, उना वचन क नम्रता छे मान्य कर लेवु जो दिल मा वेर्या गया आरू जो तुमरे जीव क उध्दार कर सकता छे।