1 आब तुहुरिन्के चिट्ठीमे लिख्के पुँछ्लक प्रश्नक बारेमे मै बताइतुँ: का हमार लग यी मजा नै हुई कि हम्रे भोज ना करी? 2 पर व्यभिचार सम्बन्धी कैयो परीक्षा हुइलक कारणसे मै तुहुरिन्हे सल्लाहा देहतुँ कि प्रत्येक पुरुष मनै भोज करलिँत। और ऊ अपन जन्नीक संग बफादार रहे। अस्तेहेँके प्रत्येक महिलन फेन भोज करलिँत। और ओइने फेन अपन थरवक संग बफादार रहिँत।
3 थरवा अपन जन्नीहे ओकर पूरा भोजाहा सुख देहे, और अस्तेहेँके जन्नी फेन अपन थरवाहे पूरा भोजाहा सुख देहे। 4 जन्नीहे ओकर अपन शरीरमे अधिकार नै हुइतिस, पर ओकर शरीरमे ओकर थरवक हक बतिस; ओस्तेहेँके थरवाहे फेन ओकर अपन शरीरमे अधिकार नै हुइतिस, पर ओकर शरीरमे ओकर जन्नीक हक बतिस।
5 तुहुरे अपन थरवा जन्नीमे एकदोसर जहनहे शारीरिक सम्बन्ध बनैनासे अस्वीकार ना करो। थोरचे समयक लग सल्लाहा करके प्राथना करक लग अल्गे बैठ्लेसे फेन आकुर समयमे भर संगे रहो। नै ते यदि तुहुरे अपन मनहे थाम्हे नै सेक्बो कलेसे शैतान तुहुरिन्हे फँसैना मौका भेटाजाई।