2 तबेकमारे, यी बात खास बा कि मण्डलीक अगुवनकेमे यी गुण हुई परना जरुरी बा: ओइन्केमे कौनो दोष ना होए। ओइन्के एक्केथो किल जन्नी रहिन्। ओइने एकथो शान्त तरिकासे व्यवहार करुइया हुई परत। ओइन्के विवेक शुद्ध हुई परत। और ओइने मनैनसे आदर भेटाई सेक्ना हुई परत। ओइने अपन घरेम आइल पहुननके स्वागत करनाहाँ हुई परत। परमेश्वरके वचन मजासे सिखैनामे ओइने सिपार हुई परत।
12 मण्डलीक सहायक अगुवनहे अपन जन्नीकमे बफादार हुई परत। ऊ अपन लर्कनके संगसंगे परिवारके दोसुर सक्कु सदस्यनके फेन अगुवाई करे सेक्ना हुई परत। और ओइन्के रेखदेख करे सेक्ना हुई परत।