2 तबेकमारे, यी बात खास बा कि मण्डलीक अगुवनकेमे यी गुण हुई परना जरुरी बा: ओइन्केमे कौनो दोष ना होए। ओइन्के एक्केथो किल जन्नी रहिन्। ओइने एकथो शान्त तरिकासे व्यवहार करुइया हुई परत। ओइन्के विवेक शुद्ध हुई परत। और ओइने मनैनसे आदर भेटाई सेक्ना हुई परत। ओइने अपन घरेम आइल पहुननके स्वागत करनाहाँ हुई परत। परमेश्वरके वचन मजासे सिखैनामे ओइने सिपार हुई परत। 3 ओइने मडुवा या एकथो असिन मनैया नै हुई परत, जे हरदम झगरा खेल्ती रहत। ओइने दयालु, सँस्सा करे सेक्ना और शान्त स्वभावके मनै हुई परत। वादविवाद करनाहाँ नै हुई परत। और ना ते धनके लाल्ची हुई परत। 4 ओइने अपन परिवारहे डगर देखैनामे सिपार हुई परत। और ओइने अपन छाइछावनहे असिन सिखुइया हुई परत कि हरेक बातमे आदरसे ओइने ओकर आज्ञा पालन करिँत।
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