2 हे मोरिक प्रिय संघरिया, मै यी प्राथना करतुँ, कि जसिके तोहाँर आत्मिक जीवन मजै चलता, ओस्तेके तुँ हरेक बातमे मजा रहो, और तोहाँर शरीर फेन बल्गरे पलिरहे।
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2 हे मोरिक प्रिय संघरिया, मै यी प्राथना करतुँ, कि जसिके तोहाँर आत्मिक जीवन मजै चलता, ओस्तेके तुँ हरेक बातमे मजा रहो, और तोहाँर शरीर फेन बल्गरे पलिरहे।