12 ठिक ओस्तेके यदि जन्नी मनैया अपन थरवासे छुट्पत्तर देके दोसुर जहनसे भोज करत कलेसे, ऊ फेन व्यभिचार करत।"
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12 ठिक ओस्तेके यदि जन्नी मनैया अपन थरवासे छुट्पत्तर देके दोसुर जहनसे भोज करत कलेसे, ऊ फेन व्यभिचार करत।"
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