विश्वासके शक्ति
20 दोसुर बेहानके जब येशू और हुँकार चेलनके यरुशलेम शहर ओहोँर फिर्ता जाइतिहिँत। तब ओइने अञ्जीरके रुख्वा देख्लाँ, जिहिहे येशू सरापल रहिँत। उ रुख्वा जरब्वँट्टीसे सुखगिल रहे। 21 तब् पत्रुसहे अञ्जीरके रुख्वाहे येशूक कलक उ बात याद अइलिस। और ऊ येशूहे कहल, "गुरुजी, हेरी, जोन अञ्जीरके रुख्वाहे अप्नि सराप देहल रही, उ ते सुखागिल बा।" 22 येशू अपन चेलनहे जवाफ देलाँ, "विश्वास करो कि जोन तुँ माँगल बतो, परमेश्वर उ करदिहीँ। 23 जात्तिके मै तुहुरिन्हे कहतुँ, ‘तुहुरे यी पहाड़हे कहे सेक्बो, उँखरके समुन्दरमे गिरजा’ और ओस्तेहेँ होजाई। पर अपन मनमे शंखा नै करहो, कि असिन हुई। बेन विश्वास करो कि जोन ऊ माँगल बा, परमेश्वर ऊ करदिहीँ, तब् परमेश्वर ओकर लग करदिहीँ। 24 तबेकमारे मै कहतुँ, जब तुहुरे प्राथना करथो और कुछु मंग्थो, ते यी विश्वास करहो कि ऊ तुहुरिन्हे पक्कै मिली, और ज्या फेन तुहुरे मंग्बो, परमेश्वर तुहुरिन्हे दिहीँ। 25 पर जब तुहुरे प्राथना करबो, तब् तोहाँर मनमे केक्रो विरोधमे रिसिबी बा कलेसे उहिहे माफ करबो कलेसे स्वर्गमे रहुइया बाबा फेन तुहुरिन्के पापहे माफ करदी।