छुट्पत्तरके बारेमे शिक्षा
31 "हमार पुर्खनहे नियम और कानुनके बारेमे असिके कहिगिल रहिन, कि ‘जे अपन जन्नीहे छोरत, ऊ उहिहे छुट्पत्तर लिखदेहे।’ 32 पर मै तुहुरिन्हे कहतुँ, जे अपन जन्नीहे व्यभिचारके कारण बाहेक दोसुर कारणसे छुट्पत्तर दि कलेसे, ऊ उहिहे व्यभिचारिणी बनाइत, और जे छोरल जन्नीक संग भोज करी, ऊ व्यभिचार करी।"