32 पर मै तुहुरिन्हे कहतुँ, जे अपन जन्नीहे व्यभिचारके कारण बाहेक दोसुर कारणसे छुट्पत्तर दि कलेसे, ऊ उहिहे व्यभिचारिणी बनाइत, और जे छोरल जन्नीक संग भोज करी, ऊ व्यभिचार करी।"
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32 पर मै तुहुरिन्हे कहतुँ, जे अपन जन्नीहे व्यभिचारके कारण बाहेक दोसुर कारणसे छुट्पत्तर दि कलेसे, ऊ उहिहे व्यभिचारिणी बनाइत, और जे छोरल जन्नीक संग भोज करी, ऊ व्यभिचार करी।"