चिन्ता और फिक्री नै करना
25 "तबेकमारे मै तुहुरिन्हे कहतुँ, रोज ‘का खैबुँ, का पिबुँ’ कहिके जिअक लग और ‘का घल्बुँ’ कहिके अपन शरीरके लग चिन्ता जिन करो। पक्कै फेन जीवन खानासे धेउर और शरीर लुग्गाफाटासे धेउर किम्ती बा। 26 आकाशके चिरैँचुरुंगीनहे हेरो। ओइने ना ते बिया छित्थाँ। ना अनाज कटनी करथाँ। ना देहरीमे जमा करथाँ। पर स्वर्गमे रहुइया बाबा ओइन्हे खवैथिन। पक्कै फेन तुहुरे चिरैँचुरुंगीनसे धेउर किम्ती बतो।