मंडली मे अनैतिक सदस्य
1 ह्या तक सुनना मे आयो हइ कि तुम मे व्यभिचार होस हइ, क्युकी असो व्यभिचार जो गैरयहूदीहोन मे भी नी होतो कि एक इन्सान अपना बाप की लुगइ खे रखस हइ.5:1 लैव्यव्यवस्था 18:8; व्यवस्था विवरन 22:30 2 अरु तुम शोक तो नी कर्हे, जेका से असो काम कर आला तुमारा बीच मे से नीकल्या जास का पर घमण्ड करस हइ.