18 व्यभिचार से बच्या र्हेनु जित्ता अरु पाप इन्सान करस हइ, वे आंग का बाहेर हइ, पर व्यभिचार करणआला अपना ही आंग का विरुद्ध पाप करस हइ. 19 का तुम नी समजे कि तुमारो आंग पवित्र आत्मा को मन्दिर हइ. जो तुम मे बस्यो हुयो हइ अरु तुमखे परमेश्वर का तरफ से मील्यो हइ, अरु तुम अपना नी हइ? 20 क्युकि दाम दिखे मोल लिया गए हइ, येकालिये अपनो आंग का द्वारा परमेश्वर की महिमा करणु.