अदमी अरु लुगेन
1 या रित से हे लुगइहोन अपना तुम खे अपना अदमी का अधीन ऱ्हे, अगर कोय परमेश्वर को वचन पर विश्वास नी कर्हे ते व्हा तुम्हारो व्यवाहार से विश्वास करण का लिये जीत्यो जाह्ये येका लिये तुमखे ओकासे कोय बात करण की भी जरुरत नी हइ, 2 क्युकी वे देख्ये की तुम्हारो स्वभाव कसो अच्छो अरु भक्तिपुरो हइ. 3 अपना आप खे साजरी करण का लिये बाहेर सझनो सवरनो खे इस्तेमाल नी कर्यो, जसो की बाल गुथीले, या फिर सोना को बर्तन पेनन, या अच्छा अच्छा कपडा पेननो, 4 जब की तुम्हारी साजरी तुम्हारो अंदरुनी व्यकतीत्व बनस हइ, नाजुक व अविनाशी सजावट से साजरी र्हियेका परमेश्वर की नजर मे जो मोलको हय. 5 पैयले युग कि पवित्र लुगइ भी जो परमेश्वर पर आस रखती थी, अपना आप खे या रीति से सवारती अरु अपना अपना इन्सानहोन का अंदर र्हेती थी. 6 जसो सारा अपनो अदमी अब्राहम की आज्ञा मे रहेती अरु वोको स्वामी बोलती थी यो प्रकार भी अगर अच्छो करीखे अरु कोय प्रकार को डर से डरनु नी हुये ते सारा की बेटिहोन रुख्ये.