8 हे प्रेम दोस, या एक बात खे मत भुलनु की प्रभु कि नजर मे एक दिन हजार साल मे कोय फरक नी हइ. वोका लिये यो दिन भी बराबर हइ. 9 प्रभु अपनी प्रतीज्ञा का बारे मे देर नी कर्हे जसी कुछ दुन्या समजस हइ. पन तुमारा बारे मे धिर धरस हइ, अरु नी चाह्ये, कि कोय खतम हुये. क्युकी यो सब को मन फिराव को अवसर मील्हे.
10 पन प्रभु को दिन चोर का जसो अय जाह्येका वु दिन बद्दल गर्झना का सात नी दिखानो हुय जाह्ये वो का बाद बद्दल कि सब चिज पानी खे खतम हुय जाह्ये अरु पृथ्वी अरु वोका पर की बात गायब हुय जाह्ये.