राज्य का अधिकारीहोन का प्रती कर्तव्य
1 हर एक इन्सान शासकिय अधिकाहोन का अधीन रेस क्युकि अधिकार असो नी जो परमेश्वर का मन का तरप से नी हुये. अरु जो अधिकार हइ वे परमेश्वर खे ठहरायो हुयो हइ. 2 येका लिये जो कोय अधिकार को विरोध करस हइ वो परमेश्वर कि विधी का सामने करस हइ अरु सामनो करणवाला खे दण्ड मीले.