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तीतुस 1:5-9

HLT Hindi Literal Text

प्राचीन की योग्यताएँ

5 मैं इस उद्देश्य से तुझे क्रेते में छोड़ आया था, कि तू शेष रही हुई बातों को सुधारे, और मेरी तुझे दी हुई आज्ञा के अनुसार नगर-नगर में प्राचीनों को नियुक्त करे।

6 यदि कोई निर्दोष और एक ही पत्नी का पति हो, जिसके बच्चे विश्वास्योग्य हों, जिन पर लापरवाह व्यवहार या विद्रोह का दोष न हो।

7 अध्यक्ष को इसलिए निर्दोष होना चाहिए क्योंकि परमेश्वर का भण्डारी है; न हठी, न आसानी से गुस्सा होने वाला, न पियक्कड़, न उपद्रवी, और न लोभी हो।

8 बल्कि, वह अतिथि-सत्कार करनेवाला, भलाई का चाहनेवाला, विवेकपूर्ण, धर्मी, पवित्र और संयमी हो;

9 वह विश्वसनीय सन्देश को जो शिक्षा के अनुसार है, थामे रहे; ताकि खरी शिक्षा से वह दो चीजें कर सके, दूसरों को उत्साहित; और जो उसका विरोध करते हैं, उन्हें डाँटें।

Em outras traduções

  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    5 मैंने तुम्हें क्रेते द्वीप में इसलिये छोड़ा था कि तुम वहां बचे हुए काम की पूरी व्यवस्था करो तथा हर एक नगर में मेरे अनुदेशानुसार ऐसे कलीसिया-पुरनियों की नियुक्ति करो, 6 जो निर्दोष तथा एक पत्नी के पति हों, जिनकी संतान विश्वासी हो तथा जिन पर कामुकता और निरंकुशता का आरोप न हो. 7 परमेश्वर द्वारा चुने हुए प्रबंधक के रूप में भंडारी का निर्दोष होना ज़रूरी है, न कि हठी, क्रोधी, मदिरा पीनेवाला, झगड़ालू या लालची. 8 वह अतिथि-सत्कार करनेवाला, सब प्रकार की उचित बातों का समर्थक, विवेकशील, न्यायी, पवित्र तथा ऐसा हो जिसने अपनी इंद्रियों को अपने वश में कर लिया हो. 9 वह उस विश्वसनीय संदेश पर स्थिर रहे, जो सिद्धांत शिक्षा के अनुकूल है कि वह खरी शिक्षा का उपदेश कर इसके विरोधियों का मुंह बंद कर सके.

  2. HSB Hindi Standard Bible

    5 मैं तुझे क्रेते में इस कारण छोड़ आया था कि तू शेष बातों को सुधारे और मेरे आदेश के अनुसार प्रत्येक नगर में प्रवरों को नियुक्‍त करे। 6 प्रवर निर्दोष, और एक ही पत्‍नी का पति हो, और उसके बच्‍चे विश्‍वासी हों, दुराचार या अवज्ञाकारिता के दोषी न हों। 7 परमेश्‍वर के भंडारी के रूप में अध्यक्ष के लिए आवश्यक है कि वह निर्दोष हो; वह न तो अहंकारी, न क्रोधी, न पियक्‍कड़, न मारपीट करनेवाला और न ही धन का लोभी हो, 8 बल्कि अतिथि-सत्कार करनेवाला, भलाई का चाहनेवाला, समझदार, न्यायप्रिय, पवित्र और संयमी हो, 9 और वह उस विश्‍वासयोग्य वचन को दृढ़ता से थामे रहे जो धर्मोपदेश के अनुसार है, ताकि वह खरी शिक्षा का उपदेश दे सके और विरोधियों का मुँह भी बंद कर सके।

  3. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    5 मैं इसलिए तुझे क्रेते में छोड़ आया था, कि तू शेष रही हुई बातों को सुधारें, और मेरी आज्ञा के अनुसार नगर-नगर प्राचीनों को नियुक्त करे। 6 जो निर्दोष और एक ही पत्नी का पति हो, जिनके बच्चे विश्वासी हो, और जिन पर लुचपन और निरंकुशता का दोष नहीं। 7 क्योंकि अध्यक्ष को परमेश्वर का भण्डारी होने के कारण निर्दोष होना चाहिए; न हठी, न क्रोधी, न पियक्कड़, न मारपीट करनेवाला, और न नीच कमाई का लोभी। 8 पर पहुनाई करनेवाला, भलाई का चाहनेवाला, संयमी, न्यायी, पवित्र और जितेन्द्रिय हो; 9 और विश्वासयोग्य वचन पर जो धर्मोपदेश के अनुसार है, स्थिर रहे; कि खरी शिक्षा से उपदेश1:9 खरी शिक्षा से उपदेश: अर्थात् सुसमाचार की खरी शिक्षा। इसका मतलब हैं कि वह इसे पकड़कर स्थिर रहें, उनके विरोध में जो इसे खीच कर दूर कर सकता हैं। दे सके; और विवादियों का मुँह भी बन्द कर सके।

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