आपसी झगड़े
1 क्या तुममें से कोई किसी दूसरे के साथ झगड़ा होने पर न्याय के लिए पवित्र लोगों के पास न जाकर अधर्मियों के पास जाने का दुस्साहस करता है? 2 क्या तुम यह नहीं जानते कि पवित्र लोग जगत का न्याय करेंगे? और यदि तुम्हारे द्वारा जगत का न्याय किया जाना है, तो क्या तुम इन छोटे से छोटे विषयों का न्याय करने के भी योग्य नहीं हो? 3 क्या तुम नहीं जानते कि हम स्वर्गदूतों का न्याय करेंगे? सांसारिक विषयों की तो बात ही छोड़ो। 4 यदि वास्तव में तुम्हें सांसारिक विषयों का न्याय करना हो, तो फिर क्या तुम ऐसे लोगों को नियुक्त करोगे जिनका कलीसिया में कोई महत्त्व नहीं? 5 मैं तुम्हें लज्जित करने के लिए यह कह रहा हूँ। क्या तुममें एक भी बुद्धिमान नहीं जो भाइयों के आपसी झगड़े सुलझा सके?