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1 Tessalonicenses 2

रच

1 इयो, वयनति हमआनयरनहीं , 2 परनति ििें ुःउठऔर अपमसहनपर ी, हमें अपनपरम्‍वर ें ऐसहस ्‍ि हम िें परम्‍वर समसके। 3 ोंि हमउपदरम े, अशधतऔर छल ै, 4 बलि परम्‍वर हमें समौंपनसमझा, हम करतैं—मनों रसन्‍करनिनहीं बलि परम्‍वर रसन्‍करनि, हममनों ाँचतै।

5 नति हमनकभपलनहीं और िबहबन(परम्‍वर ै)। 6 हमनमनों रशी, मसऔर सरों े, 7 जबकि मसिहम पर बन सकते। हमनें रहकर मलति, एक अपनबच्‍ों लन-पषण करतै। 8 इस रकमसहमें इतन्‍गयि हम ें परम्‍वर समनहीं बलि िअपने; इसलिि हमिगए े।

9 इयो, ें हमपरिरम और कष्‍ों मरण ि हमनऔर िकरतपरम्‍वर समरचिि हम ममें िपर बनें। 10 और परम्‍वर ि ि्‍िों हमयवहपवि, िऔर िा। 11 नति िअपनयवहकरतहम ममें रतउपदे, िकरतऔर समझरह12 ि ल-चलन उस परम्‍वर ो, ें अपनऔर महिें ै।

13 इसरण हम ितर परम्‍वर धनयवकरतैं ि जब हमें परम्‍वर वचन िा, मनउसमनों नहीं, बलि परम्‍वर वचन समझकर रहण ि(सचमवह ी) ि्‍करनों ें करतै।

14 इयो, मसें परम्‍वर उन कलिअनकरण करनबन गए यहिें ैं, ोंि मनअपनशविों ुःसहउनोंयहिों सहा, 15 िोंरभऔर भवियवक्‍और हमें सता। परम्‍वर रसन्‍नहीं करते, और सब मनों िैं। 16 रयहिों उनकउदिकरनहमें कतैं। इसकपरिमसवरउनकों घड़सदभरतै; और अब ततउन पर रकपड़ै।

कलििलनइच

17 इयो, जब हम समय िमसगए (आतें नहीं परशरें) हमनबड़लसखनिऔर अधिरयत्‍िा। 18 इसलिहमने, िषकर र-बआना, परहमें िकरतरहा। 19 हमरभ आगमन पर उसकमनहमआशआनगरभला? नहीं? 20 हमरव और आनो।

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