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1 Tessalonicenses 5

रभि

1 अब इयो, समयों और ों िषय ें यह आवशयक नहीं ि ें ि, 2 ोंि वयभली-ाँि नति रभिऐसआएगआतै। 3 जब कहेंे, "ांि और रकै," तब गरभवत्‍पर रसव-पआतै, अचनक उन पर िपड़ा, और बच नहीं सकेंे। 4 परइयो, धकें नहीं ि वह िपर समपड़े, 5 ोंि सब ि और िो; हम ैं और धके। 6 अतहम सरों समरहें, बलि गतऔर सचरहें।

7 ैं ैं, और मतवैं मतवैं। 8 परहम िैं, इसलिआओ, हम ि्‍और कवच और उदआशपहनकर सचरहें; 9 ोंि परम्‍वर हमें रकिनहीं बलि हमरभमसउद्‍करनिठहरै, 10 हमिमरि हम गतों ों, हम िलकर उसकिरहें। 11 इसलिएक सरिकरऔर एक सरउन्‍नति करो, ि कर रहो।

उपदऔर आशिवचन

12 अब इयो, हम मसिनतकरतैं ि परिरम करतैं, और रभें ऊपर अधिैं तथें िैं, उनकसमकरो; 13 और उनकरण मपवक उनकअतयधिआदर करो। आपस ें ल-मिरहो। 14 इयो, हम मसिनत5:14 तुमसे विनती : या, तुम्हें प्रोत्साहित करतैं ि अनिचलतैं उनें वनो, यरों हन ो, िबलों ो, सब रति सहनशलति15 रखि बदलिकरे, परसदएक सरऔर सब ों भलकरनरयत्‍करो।

16 सदआनिरहो। 17 ितर थनकरतरहो। 18 हर ें धनयवकरो, ोंि मसें िपरम्‍वर यहइचै। 19 आत20 भवियविों समझो। 21 सब ों परखो, और अचउसढ़तरहो। 22 हर रकरहो।

23 अब ांि परम्‍वर वयें ि पविकरे, और आतऔर और हमरभमसआगमन तक िऔर रकिरहें। 24 ि्‍सयै, और वह ऐसकरा।

25 इयो, हमिथनकरतरहो।

26 पविुंबन सब इयों अभिदन करो।

27 ैं रभें ें आद5:27 अक्षरशः शपथ ूँ ि यह पतसब5:27 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "पवित्र" लिखा है। इयों पढ़कर

28 हमरभमसअनरह पर रहे। आम5:28 कुछ हस्तलेखों में "आमीन" नहीं है।

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1 Tessalonicenses
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