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2 Coríntios 3

मसपत

1 हम िअपनरशकरनलगे? अनों समहमें ें रशा-पतमसआवशयकतै? 2 हमपतो, हमदयों पर िगयऔर उससब पहचनतऔर पढ़तैं। 3 यह पष्‍ि हमफलसवरमसपतो, िनहीं बलि िपरम्‍वर आते, और पतथर पटिपर नहीं बलि नवदय-पटल पर िगयै। 4 मसपरम्‍वर पर हमें ऐसभरै। 5 यह नहीं ि हम अपनआपकइस समझें ि हम कर सकतैं, बलि हमयतपरम्‍वर ओर ै। 6 उसनहमें उस नई वक बना, अकषर नहीं परआतै, ोंि अकषर रतै, परआतवन ै।

नई

7 अब यदि उस 3:7 अक्षरशः मृत्यु की उस सेवा िसकअकषर पतथरों पर गए, इतनमय ि इसएल उस रण ुँओर एकटक सकघटतरहा, 8 िआत3:8 अक्षरशः आत्मा की सेवा और मय ों ी? 9 ोंि यदि ठहर3:9 अक्षरशः दोषी ठहरानेवाली सेवा मय ी, धरठहर3:9 अक्षरशः धर्मी ठहरानेवाली सेवा और अधिमय ी। 10 तव ें वह मय ी, अब उससअधिमय रण िगई ै; 11 ोंि यदि घटतरहमय ी, वह िऔर अधिमय ी।

12 अतऐसआशरण हम बड़हस लतैं, 13 और समनहीं ैं अपनुँपर परदरहति इसएल उस घटतरहे। 14 परउनकमन कठिगए और आज तक पढ़तसमय वहपरदिहटउन पर पड़रहतै, ोंि वह मसें हटै। 15 आज जब कभतक पढ़ै, उनकदय पर परदपड़रहतै। 16 परजब रभओर िरतै, वह परदहटिै। 17 रभआतै, और जहाँ रभआतवहाँ वतरतै। 18 हम सब उघुँरभदरपण ें खतरभअरआतउसजसें श-अकरकबदलतैं।

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