8 (क्योंकि वह धर्मी मनुष्य उनके बीच रहते हुए उनके अधर्म के कार्यों को देखता और सुनता था तथा उसकी धर्मी आत्मा दिन-प्रतिदिन पीड़ित होती रहती थी);
8 (क्योंकि वह धर्मी मनुष्य उनके बीच रहते हुए उनके अधर्म के कार्यों को देखता और सुनता था तथा उसकी धर्मी आत्मा दिन-प्रतिदिन पीड़ित होती रहती थी);