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यूहन्‍ना की दूसरी पत्री 1

अभिदन

1 रवर ओर उस महिऔर उसकबच्‍ों , िनसैं सतें रखतूँ—और वल ैं, बलि सब उस सतनतैं— 2 ोंि वह सतहममें बनरहतऔर सदहमरहा। 3 परम्‍वर िओर े, और िमसओर अनरह, दयऔर ांि हमसतऔर ें बनरही।

सतऔर रम

4 ैं बहआनिि ैंबच्‍ों उस आजअनसतपर चलतहमें ििी। 5 अब महिा, ैं झसिनतकरतूँ ि हम आपस ें रखें; यह ैं िनई आजें नहीं बलि वहिरहूँ आरहमें िै। 6 यह ि हम उसकआजअनचलें। आजयह मनआरि ें चलो। 7 ोंि ें बहभरमिकल पड़ैं नहीं नति मसें आया। यहभरमऔर मसह-विै। 8 अपनकसकरि उनें िनकिहमनपरिरम िा, बलि रतिफल 9 मसिचलऔर उसमें बननहीं रहता, उसकपरम्‍वर नहीं; उस िें बनरहतै, उसकिऔर ों ैं। 10 यदि आए और यह िे, उसअपनघर ें आनऔर उसनमसकरो; 11 ोंि उसनमसकरतै, वह उसकों ें सहभै।

िअभिदन

12 बहें ैं पर ैं गज़ और ें िखननहीं हता, परआशकरतूँ ि आकर आमने-मनकरूँ, िससहमआन13 बहन बच्‍नमसकहतैं।

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