3 सब से पहले तुम यह समझ लो कि अंतिम दिनों में ठट्ठा करनेवाले ठट्ठा करते हुए आएँगे, और अपनी लालसाओं के अनुसार चलेंगे, 4 और कहेंगे, "उसके आने की प्रतिज्ञा कहाँ गई? क्योंकि जब से हमारे पूर्वज सो गए हैं तब से सब कुछ वैसा ही बना हुआ है जैसा सृष्टि के आरंभ से था।" 5 वे जानबूझकर इस बात को अनदेखा कर देते हैं कि परमेश्वर के वचन के द्वारा आकाश का अस्तित्व तो बहुत पहले से है, और उसी के द्वारा पृथ्वी जल में से रची गई और जल के द्वारा स्थिर है, 6 और इसी के द्वारा उस समय का जगत जलमग्न होकर नष्ट हो गया था। 7 परंतु उसी वचन के द्वारा यह आकाश और यह पृथ्वी आग से भस्म किए जाने के लिए रखे गए हैं तथा ये अधर्मी मनुष्यों के न्याय और विनाश के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे।