25 और न ही मनुष्यों के हाथों से सेवा लेता है मानो उसे किसी बात की आवश्यकता हो, क्योंकि वह स्वयं सब को जीवन और श्वास और सब कुछ देता है।
25 और न ही मनुष्यों के हाथों से सेवा लेता है मानो उसे किसी बात की आवश्यकता हो, क्योंकि वह स्वयं सब को जीवन और श्वास और सब कुछ देता है।