18 और तुम्हारे मन की आँखें ज्योतिर्मय हो जाएँ ताकि तुम जान सको कि तुम्हारी बुलाहट की आशा क्या है, और पवित्र लोगों में उसके उत्तराधिकार की महिमा का धन क्या है,
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18 और तुम्हारे मन की आँखें ज्योतिर्मय हो जाएँ ताकि तुम जान सको कि तुम्हारी बुलाहट की आशा क्या है, और पवित्र लोगों में उसके उत्तराधिकार की महिमा का धन क्या है,
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