28 इस परकर पतय क भ चहए क व अपन-अपन पतन स अपन दह क समन परम रख। ज अपन पतन स परम रखत ह वह सवय स परम रखत ह; 29 कयक कई अपन दह स घण नह करत, बलक उसक पलन-पषण करत ह, जस मसह भ कलसय क सथ करत ह, 30 कयक हम उसक दह क अग ह। 31 इस करण परष अपन पत और अपन मत स अलग हकर अपन पतन क सथ मल रहग, और व दन एक तन हग। 32 यह भद त बड़ ह, पर म मसह और कलसय क वषय म कह रह ह। 33 अत तमम स परतयक अपन पतन स अपन समन परम रख, और पतन भ अपन पत क भय मन।
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