लोगों की प्रतिक्रिया
18 जब सब लोगों ने गर्जन, बिजली, और तुरही की आवाज़ को सुना, तथा पर्वत से धुआँ उठते हुए देखा, तो वे यह देखकर काँपते हुए दूर खड़े हो गए; 19 और उन्होंने मूसा से कहा, "तू हमसे बात कर, तब ही हम सुन सकेंगे; परमेश्वर हमसे बात न करे, ऐसा न हो कि हम मर जाएँ।"
20 मूसा ने लोगों से कहा, "डरो मत; क्योंकि परमेश्वर इसलिए आया है कि तुम्हारी परीक्षा करे, और उसका भय तुम्हारे मन में बना रहे कि तुम पाप न करो।" 21 वे लोग दूर ही खड़े रहे, परंतु मूसा उस अंधकार के निकट गया जहाँ परमेश्वर था।
मूसा को मिले अन्य नियम
22 तब यहोवा ने मूसा से कहा, "तू इस्राएलियों से यह कह : तुमने आप ही देखा है कि मैंने आकाश से तुम लोगों से बात की है। 23 तुम मेरे अतिरिक्त किसी को ईश्वर करके न मानना, अर्थात् अपने लिए चाँदी या सोने से देवताओं को न गढ़ना।
24 "मेरे लिए मिट्टी की एक वेदी बनाना, और अपनी भेड़ों और अपने बैलों की होमबलि और मेलबलि को उस पर चढ़ाना; हर उस स्थान पर जहाँ मैं अपने नाम का स्मरण कराऊँ, वहाँ मैं तुम्हारे पास आकर तुम्हें आशिष दूँगा। 25 यदि तुम मेरे लिए पत्थरों की वेदी बनाओ, तो तराशे हुए पत्थरों से न बनाना; क्योंकि यदि तुम उस पर अपना औज़ार लगाओगे तो तुम उसे अशुद्ध कर दोगे। 26 मेरी वेदी पर सीढ़ी से न चढ़ना, कहीं ऐसा न हो कि तेरा नंगापन उस पर दिखाई दे।