पवित्र मेज़
23 "फिर बबूल की लकड़ी की एक मेज़ बनवाना; उसकी लंबाई दो हाथ, चौड़ाई एक हाथ और ऊँचाई डेढ़ हाथ की हो। 30 मेरे सामने मेज़ पर भेंट की रोटियाँ सदा रखा करना।
23 "फिर बबूल की लकड़ी की एक मेज़ बनवाना; उसकी लंबाई दो हाथ, चौड़ाई एक हाथ और ऊँचाई डेढ़ हाथ की हो। 30 मेरे सामने मेज़ पर भेंट की रोटियाँ सदा रखा करना।
23 "तुम बबूल की लकड़ी से एक मेज़ बनाना. जो नब्बे सेंटीमीटर लंबी, पैंतालीस सेंटीमीटर चौड़ी और साढ़े सड़सठ सेंटीमीटर ऊंची होगी. 30 मेज़ पर मेरे सामने भेंट की रोटी हमेशा रखना.
23 "फिर बबूल की लकड़ी की एक मेज बनवाना; उसकी लम्बाई दो हाथ, चौड़ाई एक हाथ, और ऊँचाई डेढ़ हाथ की हो। 30 और मेज पर मेरे आगे भेंट की रोटियाँ25:30 भेंट की रोटियाँ: इसमें बारह बड़ी अख़मीरी रोटियाँ थीं, जो की मेज पर दो ढेरों में रखी जाती थी और हर ढेर पर लोबान का सुनहरा कटोरा होता था। इसको हर सब्त के दिन बदला जाता था। नित्य रखा करना।
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