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Exodus 27:9-18

निवासस्थान का आँगन

9 "फिर तू निवासस्थान का आँगन बनवाना। आँगन के दक्षिणी भाग के लिए बटे हुए महीन मलमल के परदे हों, जिनकी लंबाई एक ओर सौ हाथ की हो। 10 इसके लिए बीस खंभे बनें, और उनके बीस खांचे पीतल के हों; खंभों के कड़े और उनकी पट्टियाँ चाँदी की हों। 11 इसी प्रकार इसके उत्तरी भाग के लिए भी सौ हाथ लंबे परदे हों, और उनके लिए भी बीस खंभे और उनके बीस खांचे पीतल के हों; खंभों के कड़े और उनकी पट्टियाँ चाँदी की हों। 12 फिर पश्‍चिमी भाग में आँगन की चौड़ाई के लिए पचास हाथ के परदे हों, और उनके दस खंभे तथा उनके लिए दस खांचे भी हों। 13 पूर्वी भाग की ओर आँगन की चौड़ाई पचास हाथ की हो। 14 द्वार के एक ओर के परदे पंद्रह हाथ के हों, जिनके लिए तीन खंभे और उनके तीन खांचे हों। 15 द्वार के दूसरी ओर भी पंद्रह हाथ के परदे हों, जिनके लिए तीन खंभे और उनके तीन खांचे हों। 16 आँगन के द्वार के लिए बीस हाथ लंबा एक परदा हो जो नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े तथा बटे हुए महीन मलमल से कढ़ाई करके बनाया गया हो। उसके लिए चार खंभे और उनके चार खांचे हों।

17 "आँगन के चारों ओर के सब खंभे चाँदी की पट्टियों से जुड़े हुए हों; उनके कड़े चाँदी के और उनके खांचे पीतल के हों। 18 आँगन की लंबाई सौ हाथ, और चौड़ाई सब जगह से पचास हाथ की हो। उसके परदे की ऊँचाई पाँच हाथ की हो तथा वह बटे हुए महीन मलमल का बना हो। खंभों के खांचे पीतल के हों।

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