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फिलिप्पियों 1:9-11

HSB Hindi Standard Bible

9 मैं यह प्रार्थना करता हूँ कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और हर प्रकार की समझ में अधिक से अधिक बढ़ता जाए 10 ताकि तुम उत्तम बातों को जान लो और मसीह के दिन तक सच्‍चे और निर्दोष बने रहो, 11 तथा परमेश्‍वर की महिमा और प्रशंसा के लिए यीशु मसीह के द्वारा धार्मिकता के फल से परिपूर्ण हो जाओ।

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  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    9 मेरी प्रार्थना यह है कि तुम्हारा प्रेम वास्तविक ज्ञान और विवेक में और भी अधिक समृद्ध होता जाए, 10 ताकि तुम्हारी सहायता हो वह सब पहचान सकने में, जो सर्वश्रेष्ठ है, जिससे तुम मसीह के दिन तक सच्चे और निष्कलंक रह सको, 11 तथा मसीह येशु के द्वारा प्रभावी धार्मिकता से परमेश्वर की महिमा और स्तुति के लिए फल लाओ.

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    9 और मैं यह प्रार्थना करता हूँ, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए, 10 यहाँ तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो1:10 उत्तम बातों को प्रिय जानो: सही और गलत क्या था, अच्छाई और बुराई क्या थी, इसकी समझ होना।, और मसीह के दिन तक सच्चे बने रहो, और ठोकर न खाओ; 11 और उस धार्मिकता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिससे परमेश्वर की महिमा और स्तुति होती रहे। (यशा. 15:8)

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