शिष्यों पर यीशु का प्रकट होना
19 उसी दिन अर्थात् सप्ताह के पहले दिन, संध्या होने पर, उस स्थान पर जहाँ शिष्य यहूदियों के डर से द्वार बंद किए हुए थे, यीशु आकर उनके बीच में खड़ा हो गया और उनसे कहा,"तुम्हें शांति मिले।" 20 और यह कहकर उसने अपने हाथ और अपनी पसली उन्हें दिखाई। तब शिष्य प्रभु को देखकर आनंदित हुए। 21 यीशु ने उनसे फिर कहा,"तुम्हें शांति मिले; जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूँ।" 22 यह कहकर उसने उन पर फूँका और उनसे कहा,"पवित्र आत्मा लो। 23 जिनके पाप तुम क्षमा करोगे तो वे क्षमा किए जाएँगे, जिनके तुम रखोगे तो वे रखे जाएँगे।"