थोमा पर यीशु का प्रकट होना
24 परंतु उन बारहों में से एक अर्थात् थोमा, जो दिदुमुस कहलाता है, जब यीशु आया तो उनके साथ नहीं था। 25 अतः अन्य शिष्य उससे कहने लगे, "हमने प्रभु को देखा है।" परंतु उसने उनसे कहा, "जब तक मैं उसके हाथों में कीलों के छेद न देख लूँ और उन कीलों के छेद में अपनी उँगली न डाल लूँ और उसकी पसली में अपना हाथ न डाल लूँ, तब तक मैं बिलकुल विश्वास नहीं करूँगा।"
26 आठ दिन के बाद उसके शिष्य फिर घर के भीतर थे और थोमा उनके साथ था। तब द्वार बंद होने पर भी यीशु आया और उनके बीच में खड़े होकर कहा,"तुम्हें शांति मिले।" 27 फिर उसने थोमा से कहा,"अपनी उँगली यहाँ ला और मेरे हाथों को देख, और अपना हाथ लाकर मेरी पसली में डाल, और अविश्वासी नहीं बल्कि विश्वासी हो।" 28 इस पर थोमा ने उससे कहा, "मेरे प्रभु! मेरे परमेश्वर!" 29 यीशु ने उससे कहा,"तूने मुझे देखा है, क्या इसलिए विश्वास किया है? धन्य हैं वे जिन्होंने बिना देखे विश्वास किया।"