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यूहन्‍ना रचित सुसमाचार 5

वन और

24 "ैं मससच-सच कहतूँ ि वचन नतऔर जनपर ि्‍करतै, अनवन उसकै, और उस पर आजनहीं ी, बलि वह ें िकलकर वन ें रवकर ै। 25 ैं मससच-सच कहतूँ ि वह समय आतबलि अब जब तक परम्‍वर आवेंे, और ेंे।

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