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यूहन्‍ना रचित सुसमाचार 6

5 जब अपनें उठकर ि एक बड़उसकचलरहै, उसनििकहा,"हम इनकििाँ कहाँ खरें?" 6 परवह उसपरखनियह कह रहा, ोंि वह वयनति वह करनै। 7 ििउसउततर िा, "6:7 दीनार : एक दीनार एक दिन की मज़दूरी के बराबर था। िाँ इनकिपर्‍नहीं ोंि हर एक ी-ि"

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