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लूका रचित सुसमाचार 4:16-21

HSB Hindi Standard Bible

नासरत में यीशु का अनादर

16 फिर वह नासरत में आया, जहाँ उसका पालन-पोषण हुआ था, और अपने नियमानुसार वह सब्त के दिन आराधनालय में गया, और पढ़ने के लिए खड़ा हुआ। 17 उसे यशायाह भविष्यवक्‍ता की पुस्तक दी गई, और उसने पुस्तक खोलकर वह स्थान निकाला जहाँ लिखा था :

18 प्रभु का आत्मा मुझ पर है,

क्योंकि उसने कंगालों को सुसमाचार

सुनाने के लिए मेरा अभिषेक किया है।

उसने मुझे भेजा है कि मैं 4:18 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "टूटे मनवालों को ठीक करूँ और" लिखा है। बंदियों को छुटकारे का

और अंधों को दृष्‍टि पाने का समाचार दूँ

और कुचले हुओं को छुड़ाऊँ

19 और प्रभु के अनुग्रह के वर्ष की घोषणा करूँ। 4:19 यशायाह 61:1-2

20 फिर उसने पुस्तक बंद की और सेवक को देकर बैठ गया, और आराधनालय में सब की आँखें उसी पर लगी थीं। 21 तब वह उनसे कहने लगा,"पवित्रशास्‍त्र का यह लेख आज तुम्हारे सुनने के साथ ही पूरा हो गया है।"

Em outras traduções

  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    16 प्रभु येशु नाज़रेथ नगर आए, जहां उनका पालन पोषण हुआ था. शब्बाथ पर अपनी रीति के अनुसार वह यहूदी सभागृह में जाकर पवित्र शास्त्र पढ़ने के लिए खड़े हो गए. 17 उन्हें भविष्यवक्ता यशायाह का अभिलेख दिया गया. उन्होंने उसमें वह जगह निकाली, जहां लिखा है:

    18 "प्रभु का आत्मा मुझ पर है,

    क्योंकि उन्होंने मेरा अभिषेक किया है,

    कंगालों को सुसमाचार देने के लिए,

    और बंदियों के लिए मुक्ति का प्रचार करने के लिए

    और अंधों को रोशनी,

    कुचले हुओं को कष्ट से छुड़ाने

    19 तथा प्रभु की कृपादृष्टि का वर्ष के प्रचार के लिए भेजा है."4:19 यशा 61:1, 2; 58:6

    20 तब उन्होंने पुस्तक बंद करके सेवक के हाथों में दे दी और स्वयं बैठ गए. सभागृह में हर एक व्यक्ति उन्हें एकटक देख रहा था. 21 प्रभु येशु ने आगे कहा, "आज आपके सुनते-सुनते यह लेख पूरा हुआ."

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    16 और वह नासरत में आया; जहाँ उसका पालन-पोषण हुआ था; और अपनी रीति के अनुसार सब्त के दिन आराधनालय में जाकर पढ़ने के लिये खड़ा हुआ। 17 यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक4:17 यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक: यशायाह के भाग सम्मिलित थे। उसे दी गई, और उसने पुस्तक खोलकर, वह जगह निकाली जहाँ यह लिखा था:

    18 "प्रभु का आत्मा मुझ पर है,

    इसलिए कि उसने कंगालों को सुसमाचार

    सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है,

    और मुझे इसलिए भेजा है, कि बन्दियों को छुटकारे का

    और अंधों को दृष्टि पाने का सुसमाचार प्रचार करूँ और

    कुचले हुओं को छुड़ाऊँ, (यशा. 58:6, यशा. 61:1,2)

    19 और प्रभु के प्रसन्न रहने के वर्ष4:19 प्रभु के प्रसन्न रहने के वर्ष: बन्दी दास और दासी की; भूमि और सम्पत्ति की; ऋण और दायित्वों से सामान्य छुटकारे का वर्ष; (लैव्य 25: 8)। का प्रचार करूँ।"

    20 तब उसने पुस्तक बन्द करके सेवक के हाथ में दे दी, और बैठ गया: और आराधनालय के सब लोगों की आँखें उस पर लगी थी। 21 तब वह उनसे कहने लगा, "आज ही यह लेख तुम्हारे सामने पूरा हुआ है।"

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