16 प्रभु येशु नाज़रेथ नगर आए, जहां उनका पालन पोषण हुआ था. शब्बाथ पर अपनी रीति के अनुसार वह यहूदी सभागृह में जाकर पवित्र शास्त्र पढ़ने के लिए खड़े हो गए. 17 उन्हें भविष्यवक्ता यशायाह का अभिलेख दिया गया. उन्होंने उसमें वह जगह निकाली, जहां लिखा है:
18 "प्रभु का आत्मा मुझ पर है,
क्योंकि उन्होंने मेरा अभिषेक किया है,
कंगालों को सुसमाचार देने के लिए,
और बंदियों के लिए मुक्ति का प्रचार करने के लिए
और अंधों को रोशनी,
कुचले हुओं को कष्ट से छुड़ाने
19 तथा प्रभु की कृपादृष्टि का वर्ष के प्रचार के लिए भेजा है."4:19 यशा 61:1, 2; 58:6
20 तब उन्होंने पुस्तक बंद करके सेवक के हाथों में दे दी और स्वयं बैठ गए. सभागृह में हर एक व्यक्ति उन्हें एकटक देख रहा था. 21 प्रभु येशु ने आगे कहा, "आज आपके सुनते-सुनते यह लेख पूरा हुआ."