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लूका रचित सुसमाचार 8

27 जब िपर उतरउसउस नगर एक मनि्‍रसिा; वह बहसमय वस्‍नहीं पहनतऔर घर ें नहीं बलि कबों ें रहकरता। 28 वह खकर ि्‍उसकमनिपड़और आवें कहा, "परमपरधपरम्‍वर ु, झसा-ा? ैं झसिनतकरतूँ, तने।" 29 ोंि अशआतउस मनें िकल आजी, इसलिि वह र-बउसपकड़ती। उस मनों और िों ाँधकर पहरें रखा, परवह उन धनों लतऔर ्‍उसगलों ें भगिरती। 30 िउससा,"ै?" उसनकहा, "ा," ोंि उसमें बह्‍समीं। 31 उससिनतकरनलगीं ि वह उनें अथुंें आजे। 32 वहीं पहपर अरों एक बड़ुंचर रहा; उनोंउससिनति वह उनें अरों ें समअनमति े; और उसनउनें अनमति ी। 33 ि्‍उस मनें िकलकर अरों ें समगईं, और वह ुंढलओर और ा।

34 वह खकर चरवऔर नगर तथाँों ें कर समा। 35 तब उसखनििकलकर आए, और उस मनिसमें ्‍िकलीं, चरणों ें वस्‍पहनतथसचा, और डर गए

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