12 जब दिन ढलने लगा, तो बारहों ने पास आकर उससे कहा, "भीड़ को विदा कर, कि वे आस-पास के गाँवों और बस्तियों में जाकर ठहरें और उन्हें भोजन मिले, क्योंकि हम यहाँ निर्जन स्थान में हैं।" 13 परंतु उसने उनसे कहा,"तुम ही उन्हें खाने को दो।" उन्होंने कहा, "यह तभी हो सकता है जब हम जाकर इन सब लोगों के लिए भोजन खरीद लें, नहीं तो हमारे पास पाँच रोटियों और दो मछलियों को छोड़ और कुछ नहीं है।" 14 क्योंकि वहाँ लगभग पाँच हज़ार पुरुष थे। तब उसने अपने शिष्यों से कहा,"इन्हें लगभग पचास-पचास के समूहों में बैठा दो।" 15 उन्होंने ऐसा ही किया और उन सब को बैठा दिया। 16 तब उसने पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया और स्वर्ग की ओर देखकर आशिष माँगी, और उन्हें तोड़कर शिष्यों को देता गया कि लोगों को परोसें। 17 अतः सब खाकर तृप्त हो गए, और उन्होंने बचे हुए टुकड़ों की बारह टोकरियाँ उठाईं।
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लूका रचित सुसमाचार 9
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