49 परत उनहन उस झल पर चलत दखकर समझ क कई भत ह, और व चलल उठ; 50 कयक सब न उस दख और घबर गए थ। परत उसन तरत उनस बत क और कह,"सहस रख, म ह; डर मत।"
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49 परत उनहन उस झल पर चलत दखकर समझ क कई भत ह, और व चलल उठ; 50 कयक सब न उस दख और घबर गए थ। परत उसन तरत उनस बत क और कह,"सहस रख, म ह; डर मत।"