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मत्ती रचित सुसमाचार 18

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21 तब पतरस आकर उससकहा, "रभु, िकरतरहैं उसितनषमकरूँ? तक?" 22 उससकहा,"ैं झसयह नहीं कहति तक, बलि सततर तक 23 इसलिवरउस समै, िसनअपनों ा। 24 जब वह लगउसकमनएक जन गयिपर दस हज़ों18:24 1 तोड़ा लगभग 6,000 दीनार के बराबर था और एक दीनार एक दिन की मज़दूरी थी।ऋण ा। 25 परउसकिनहीं ा, आदिि उसकतथउसकपत्‍और बच्‍ों और उसकै, सब चकर ऋण 26 तब उस िरकर उसडवतिऔर कहनलगा, 18:26 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "स्वामी" लिखा है।रज धर, ैं सब ूँा।’ 27 तब उस तरस कर उसिा, और उसकऋण षमकर िा। 28 परजब वह हर िकलउसअपनएक िउसकएक 18:28 दीनार : एक दीनार एक दिन की मज़दूरी के बराबर था।ऋणा; तब वह उसपकड़कर उसकगलदबलगऔर कहा, पर ऋण ै, उसे।’ 29 इस पर उसक18:29 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "उसके पैरों पर" लिखा है।िरकर उससिनतकरनलगा, रज धर, ैं सब ूँा।’ 30 परवह नहीं बलि कर उसतब तक िें िजब तक वह ऋण े। 31 इसलिउसखकर उसकबहउद; और उनोंकर अपनवह सब बता। 32 तब उसकउसकर उससकहा, अर्‍, झसिनती, इसलिैंवह ऋण षमकर िा; 33 ैंपर दयी, अपनपर दयनहीं करनिी?’ 34 और उसकें आकर उसतनों तब तक िौंिजब तक वह उसकऋण े। 35 यदि ममें रतअपन18:35 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "के अपराधों" लिखा है।मन षमनहीं करा, वरििऐसकरा।"

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