4 इस पर उसन कह,"कय तमन नह पढ़ क सषटकरत न आरभ स उनह नर और नर बनय 5 और कह :इस करण परष अपन पत और अपन मत स अलग हकर अपन पतन क सथ मल रहग, और व दन एक तन हग। 6 अत अब व द नह बलक एक तन ह। इसलए जस परमशवर न एक सथ जड़ ह, उस मनषय अलग न कर।"
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